पद का नाम: वाइस प्रेसिडेंट (फाइनेंस और एडमिनिस्ट्रेशन)
जिम्मेदारियाँ (Responsibilities):
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कंपनी के लिए फाइनेंस से जुड़ी रणनीतियाँ, नीतियाँ और प्रक्रियाएँ बनाना और उन्हें लागू करना, ताकि पैसों का सही और कंट्रोल्ड मैनेजमेंट हो सके।
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फाइनेंशियल प्लानिंग, बजटिंग और फोरकास्टिंग की पूरी प्रक्रिया संभालना और यह सुनिश्चित करना कि सब कुछ सही, साफ़ और कंपनी के लक्ष्यों के मुताबिक हो।
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रोज़मर्रा के फाइनेंस ऑपरेशन्स देखना — जैसे पेमेंट्स, कलेक्शन, कैश फ्लो और फाइनेंशियल रिपोर्ट्स।
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मैनेजमेंट को फाइनेंशियल एनालिसिस और इनसाइट्स देना, जिससे सही फैसले, निवेश की योजना और बिज़नेस ग्रोथ में मदद मिले।
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सभी फाइनेंस नियमों, कानूनों और इंटरनल पॉलिसीज़ का पालन सुनिश्चित करना और रिस्क मैनेजमेंट के लिए सही कंट्रोल्स लागू करना।
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एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट को लीड करना — जिसमें ऑफिस, फैसिलिटी मैनेजमेंट, खरीदारी (Procurement), कॉन्ट्रैक्ट्स और वेंडर मैनेजमेंट शामिल है।
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सीनियर लीडरशिप और बाकी स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर कॉस्ट कंट्रोल, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और प्रोसेस इम्प्रूवमेंट पर काम करना।
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KPIs तय करना और उन्हें मॉनिटर करना, ताकि फाइनेंस और एडमिन प्रोसेस की परफॉर्मेंस मापी जा सके।
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ऑडिटर्स, टैक्स कंसल्टेंट्स, बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के साथ रिश्ते संभालना।
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फाइनेंस और एडमिन टीम को लीडरशिप, गाइडेंस और मेंटरशिप देना और लगातार बेहतर काम करने की संस्कृति बनाना।
आवश्यक अनुभव (Experience Required):
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सीनियर फाइनेंस लीडरशिप रोल में अनुभव, जैसे VP Finance, CFO या इसी तरह का पद।
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फाइनेंशियल प्लानिंग, बजटिंग, फोरकास्टिंग और एनालिसिस में मजबूत पकड़।
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अकाउंटिंग प्रिंसिपल्स, फाइनेंस नियमों और कंप्लायंस की अच्छी समझ।
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फाइनेंस ऑपरेशन्स संभालने का अनुभव — पेमेंट्स, रिसीवेबल्स, कैश फ्लो और रिपोर्टिंग।
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स्ट्रॉन्ग स्ट्रेटेजिक और एनालिटिकल स्किल्स, ताकि बिज़नेस फैसलों में मदद मिल सके।
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रिस्क मैनेजमेंट, इंटरनल कंट्रोल्स और ऑडिट प्रोसेस की जानकारी।
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फाइनेंस सॉफ्टवेयर और रिपोर्टिंग टूल्स का अच्छा अनुभव।
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एडमिन फंक्शन लीड करने का अनुभव — फैसिलिटी, खरीदारी और वेंडर मैनेजमेंट।
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बेहतरीन लीडरशिप और पीपल मैनेजमेंट स्किल्स।
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फाइनेंस, अकाउंटिंग या संबंधित क्षेत्र में ग्रेजुएशन या मास्टर्स डिग्री।
CPA, CFA या CMA जैसे प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन को प्राथमिकता दी जाएगी।
मुख्य परिणाम क्षेत्र (Key Result Areas – KRAs):
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फाइनेंशियल प्लानिंग और एनालिसिस: बिज़नेस लक्ष्यों को सपोर्ट करने वाली फाइनेंस स्ट्रेटेजी और बजटिंग।
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फाइनेंशियल कंट्रोल और कंप्लायंस: सभी नियमों और पॉलिसीज़ का पालन और रिस्क कंट्रोल।
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कैश फ्लो मैनेजमेंट: कैश फ्लो और वर्किंग कैपिटल को सही तरीके से संभालना।
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फाइनेंशियल रिपोर्टिंग: समय पर और सही फाइनेंशियल रिपोर्ट्स तैयार करना।
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बजटिंग और फोरकास्टिंग: सही बजट बनाना और भविष्य की प्लानिंग।
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ऑपरेशनल एफिशिएंसी: खर्च कम करना और काम करने के तरीके बेहतर बनाना।
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एडमिन और फैसिलिटी मैनेजमेंट: ऑफिस, खरीदारी, कॉन्ट्रैक्ट्स और वेंडर्स का सही प्रबंधन।
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स्टेकहोल्डर मैनेजमेंट: सीनियर लीडरशिप, ऑडिटर्स और बैंकों से बेहतर तालमेल।
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टीम लीडरशिप: टीम को गाइड करना और उनका विकास करना।
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प्रोसेस इम्प्रूवमेंट: फाइनेंस और एडमिन प्रोसेस को और बेहतर बनाना।
मुख्य प्रदर्शन संकेतक (Key Performance Indicators – KPIs):
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फाइनेंशियल परफॉर्मेंस: रेवेन्यू ग्रोथ, प्रॉफिट और ROI।
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बजट वेरिएंस: बजट और असल खर्च में अंतर का एनालिसिस।
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कैश फ्लो: लिक्विडिटी और वर्किंग कैपिटल की स्थिति।
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रिपोर्टिंग की सटीकता: फाइनेंशियल रिपोर्ट्स की सही और समय पर डिलीवरी।
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कंप्लायंस और रिस्क: नियमों और इंटरनल कंट्रोल्स का पालन।
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कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन: खर्च घटाने के नतीजे।
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स्टेकहोल्डर सैटिस्फैक्शन: फाइनेंस और एडमिन सपोर्ट से संतुष्टि।
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टीम परफॉर्मेंस: टीम की उत्पादकता और विकास।
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प्रोसेस एफिशिएंसी: प्रोसेस टाइम और लागत।
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प्रोफेशनल डेवलपमेंट: टीम मेंबर्स की ट्रेनिंग और ग्रोथ।
नोट: KRAs और KPIs कंपनी के लक्ष्यों, इंडस्ट्री और प्राथमिकताओं के अनुसार बदल सकते हैं।

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